जयपुर Mar 31, 2025, राजस्थान के शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को बड़ा झटका दिया है। राज्य सरकार ने पूर्ववर्ती गहलोत सरकार के एक और आदेश को पलट दिया है। शिक्षा विभाग ने वाइस प्रिंसिपल के पद को डाइंग कैडर घोषित करते हुए इसे समाप्त करने का फैसला लिया है। जिसके तहत सरकारी स्कूलों में वाइस प्रिंसिपल का पद खत्म हो गया है। सरकार के फैसले के बाद शिक्षा तंत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। वित्त विभाग से स्वीकृति मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं।
क्या है सरकार का नया फैसला ?
शिक्षा विभाग के आदेशानुसार, शिक्षा विभाग के अन्तर्गत वित्त विभाग की सहमति के बाद उप प्राचार्य (Vice-Principal) कैडर को Dying Cadre घोषित किया गया है।
- ‘वरिष्ठ व्याख्याता का एक नया पद सृजित किया जाता, ताकि व्याख्याताओं को पदोन्नति के अवसर प्रदान किए जा सकें तथा विद्यालयों में शिक्षण गुणवत्ता में वृद्धि हो सके। वरिष्ठ व्याख्याता के पद का वेतन स्तर RCS (RP) नियमों के अनुसार एल-14 होगा।
- उप प्राचार्य के पदो को घोषित करने से मौजूद रिक्त पदों के साथ-साथ रिक्त होने की संभावना वाले पदों को वेतन स्तर एल-14 में वरिष्ठ व्याख्याता के नए पद में परिवर्तित किया जाएगा। इस रूपांतरण से मौजूदा कैडर संरचना को बनाए रखने से व्याख्याताओं के लिए पदोन्नति पदानुक्रम और कैरियर उन्नति के अवसर स्थापित होंगे।
- वरिष्ठ व्याख्याता (वेतन स्तर एल-14 ) का पद वेतन स्तर एल-12 वाले व्याख्याताओं के पद से 100 प्रतिशत पदोन्नति द्वारा भरा जाएगा, जिनके पास कम से कम तीन वर्ष का अनुभव हो।”
Rajasthan Eduction Department
गहलोत सरकार का फैसला बदला
बता दें कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में उच्च माध्यमिक विद्यालयों में उपप्रधानाचार्य (वाइस प्रिंसिपल) के पदों का सृजन किया था। भजनलाल सरकार ने इस फैसले को पलटते हुए अब डाइंग कैडर घोषित कर दिया गया है। विभाग ने वरिष्ठ व्याख्याता का नया पद भी सृजित कर दिया है, ताकि व्याख्याताओं को पदोन्नति के अवसर प्रदान किए जा सकें।
भविष्य पर प्रभाव
शिक्षा विभाग के इस निर्णय के बाद सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नई संरचना स्थापित होगी। अब सभी उच्च माध्यमिक विद्यालयों में वरिष्ठ व्याख्याताओं की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।
सरकार का मानना है कि इस निर्णय से राज्य की शिक्षा व्यवस्था में सुधार होगा और योग्य शिक्षकों को उच्च पदों पर पहुंचने के बेहतर अवसर मिलेंगे। हालांकि, यह देखना बाकी है कि यह बदलाव स्कूल प्रशासन और शिक्षकों के कामकाज पर कितना प्रभाव डालता है।