जयपुर, 19 मार्च 2025: राजस्थान सरकार ने विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए “राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक 2025” पेश किया है। विधानसभा में पेश इस विधेयक के तहत राज्य में संचालित सभी कोचिंग संस्थानों के लिए पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर भारी जुर्माने के साथ स्थायी प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान किया गया है।
इसमें अध्यक्ष,उच्च शिक्षा के प्रभारी सचिव होंगे। स्कूल, तकनीकी, और चिकित्सा शिक्षा के प्रभारी सचिव, डीजीपी या उसके द्वारा नामित, आयुक्त कॉलेज शिक्षा, निदेशक स्थानीय निकायें पदेन सदस्य होंगे। इनके अलावा प्रमुख सचिव चिकित्सा, वित्त सचिव, कोचिंग सेंटर्स के दो प्रतिनिधि, अभिभावक सोसायटी के दो प्रतिनिधि भी सदस्य रहेंगे। उच्च शिक्षा के संयुक्त सचिव इसके पदेन सदस्य सचिव होंगे। गैर सरकारी सदस्यों का कार्यकाल एक वर्ष होगा।
इस कोचिंग सेंटरों पर नियंत्रण की जरूरत क्यों पड़ी?
पिछले कुछ दशकों में भारत में कोचिंग सेंटरों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। खासकर राजस्थान जैसे राज्य, जहां कोटा को “कोचिंग हब” के रूप में जाना जाता है, वहां लाखों छात्र हर साल मेडिकल, इंजीनियरिंग, और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। कोटा में हर साल करीब 2 लाख छात्र कोचिंग सेंटरों में दाखिला लेते हैं, और यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, इस बढ़ते कोचिंग उद्योग के साथ कई समस्याएं भी सामने आई हैं।
पहली और सबसे बड़ी समस्या है छात्रों पर अत्यधिक दबाव। कोचिंग सेंटरों में पढ़ने वाले छात्रों को लंबे समय तक पढ़ाई करनी पड़ती है, और कई बार उन्हें मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। पिछले कुछ सालों में कोटा में छात्रों द्वारा आत्महत्या के कई मामले सामने आए हैं, जिसने सरकार और समाज का ध्यान इस ओर खींचा। 2023 में कोटा में 26 छात्रों ने आत्महत्या की, जो एक चिंताजनक आंकड़ा था। इसके अलावा, कोचिंग सेंटरों की अनियंत्रित फीस, अप्रशिक्षित शिक्षक, और अनुचित प्रथाओं ने भी अभिभावकों और छात्रों के लिए परेशानी खड़ी की है।
इन सभी समस्याओं को देखते हुए राजस्थान सरकार ने कोचिंग सेंटरों को नियंत्रित करने के लिए एक ठोस कदम उठाने का फैसला किया। राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण और विनियमन) विधेयक, 2025 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस विधेयक को तैयार करने से पहले सरकार ने कई हितधारकों, जैसे कोचिंग सेंटर संचालकों, अभिभावकों, छात्रों, और शिक्षा विशेषज्ञों से सलाह ली। इसके बाद विधेयक को विधानसभा में पेश किया गया, और अब इसे जल्द ही कानून का रूप दिया जाएगा।
राजस्थान सरकार ने कोचिंग सेंटरों को नियंत्रित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। विधानसभा में बुधवार को राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण और विनियमन) विधेयक, 2025 पेश किया गया, जिसके तहत सभी कोचिंग सेंटरों को अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य कोचिंग सेंटरों में पढ़ने वाले छात्रों पर दबाव को कम करना और उनकी मानसिक सेहत को प्राथमिकता देना है।
क्या है विधेयक में खास?
इस विधेयक के अनुसार, कोचिंग सेंटरों को रजिस्ट्रेशन के बाद ही संचालन की अनुमति होगी। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के तहत सेंटर को अपनी फीस, शिक्षकों की योग्यता, और बुनियादी ढांचे की जानकारी देनी होगी। इसके अलावा, कोचिंग सेंटरों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे छात्रों पर अत्यधिक दबाव न डालें। विधेयक में यह भी प्रावधान है कि कोचिंग सेंटर 5 साल से कम उम्र के बच्चों को दाखिला नहीं दे सकते और न ही उनकी कक्षाएं ले सकते।
छात्रों को 10 दिन के भीतर फीस वापसी का प्रावधान
विधेयक के अनुसार यदि कोई विद्यार्थी 10 दिन के भीतर कोर्स छोड़ देता है तो कोचिंग संस्थान को शेष अवधि की फीस वापस करनी होगी। इसके अलावा, छात्रावास, कैंटीन और अन्य शुल्क भी लौटाने का प्रावधान किया गया है।नए विधेयक के अनुसार कोचिंग सेंटर की फीस पाठ्यक्रम के अनुरूप उचित तय करनी होगी। रसीदें उपलब्ध कराना जरूरी होगा। यदि कोई बच्चा बीच में ही कोचिंग छोड़ता है तो उसे दस दिन में शेष अवधि की आनुपातिक फीस लौटानी होगी। भोजन या छात्रावास की फीस भी उसी अनुरूप लौटानी होगी। पढ़ने के दौरान बीच में फीस बढ़ाई भी नहीं जाएगी। संपूर्ण पाठ्यक्रम की फीस, पूरा होने की अवधि, भोजनालय आदि की फीस प्रोस्पेक्टस में लिखनी होगी। पेपर्स सहित अन्य सामग्री के लिए बच्चों से अतिरिक्त फीस नहीं लीं जा सकेगी।
कानून तोड़ने पर सख्त कार्रवाई – जुर्माना व सजाः
किसी प्रकार की शिकायत पर परिवाद जिला समिति को दर्ज कराया जा सकेगा। समिति मामले की जांच कर आदेश देगी। रजिस्ट्रेशन की शर्तों के उल्लंघन पर पहली बार 20 हजार रुपए, दूसरी बार 50 हजार रुपए जुर्माना और उसके बाद्र उल्लंघन किया तो रजिस्ट्रेशन रद्द होने के साथ बैन लगेगा। जुर्माना नहीं भरा तो राशि भू-राजस्व के बकाया रूप में वसूली जाएगी। सेंटर की ओर से किसी अन्यं आपराधिक कृत्य पर रजिस्ट्रेशन किसी भी समय रद्द किया जा सकेगा। हालांकि, कोचिंग सेंटर प्राधिकरण में अपील कर सकेंगे। कोई भी कोचिंग सेंटर भ्रामक विज्ञापन प्रचारित नहीं कराएगा।
छात्रों पर दबाव कम करना प्राथमिकता
नए विधेयक में यह स्पष्ट किया गया है कि कोचिंग सेंटरों को छात्रों की मानसिक सेहत पर ध्यान देना होगा। इसके लिए सेंटरों को समय-समय पर काउंसलिंग सत्र आयोजित करने होंगे। साथ ही, कोचिंग सेंटरों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी फीस संरचना पारदर्शी हो और अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।
शिक्षा मंत्री का बयान
शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में कहा, “हमारा मकसद कोचिंग सेंटरों को बंद करना नहीं, बल्कि उन्हें नियंत्रित करना है ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो। कोचिंग सेंटरों में बढ़ते दबाव और मानसिक तनाव को देखते हुए यह कदम जरूरी था।”
प्रशिक्षकों की योग्यता पर जोर
विधेयक में यह भी प्रावधान है कि कोचिंग सेंटरों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूरी करनी होगी। इसके साथ ही, सेंटरों को अपने शिक्षकों की जानकारी जिला समिति को देनी होगी, जो उनकी योग्यता की जांच करेगी।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
शिक्षा विशेषज्ञों ने इस विधेयक का स्वागत किया है। उनका कहना है कि कोचिंग सेंटरों में अनियंत्रित ढंग से चल रही गतिविधियों पर लगाम लगाना जरूरी था। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून को लागू करने में सरकार को सख्ती बरतनी होगी, तभी इसका असर दिखेगा।
राजस्थान विधानसभा में पेश हुआ कोचिंग सेंटर नियंत्रण विधेयक: छात्रों की मानसिक सेहत और शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर
विधेयक के मुख्य प्रावधान
- कोचिंग सेंटरों पर सख्त निगरानी: राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण और विनियमन) विधेयक, 2025 में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं, जो कोचिंग सेंटरों के संचालन को नियंत्रित करने और छात्रों के हितों की रक्षा करने के लिए बनाए गए हैं। इन प्रावधानों को विस्तार से समझते हैं:
- अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: विधेयक के अनुसार, राजस्थान में संचालित सभी कोचिंग सेंटरों को अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। रजिस्ट्रेशन के बिना किसी भी कोचिंग सेंटर को संचालित करने की अनुमति नहीं होगी। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के तहत कोचिंग सेंटरों को अपनी फीस संरचना, शिक्षकों की योग्यता, और बुनियादी ढांचे की जानकारी देनी होगी। यह रजिस्ट्रेशन जिला समिति द्वारा किया जाएगा, जिसमें शिक्षा विभाग के अधिकारी, मनोवैज्ञानिक, और अन्य विशेषज्ञ शामिल होंगे।
- 5 साल से कम उम्र के बच्चों पर प्रतिबंध: विधेयक में यह स्पष्ट प्रावधान है कि कोचिंग सेंटर 5 साल से कम उम्र के बच्चों को दाखिला नहीं दे सकते और न ही उनकी कक्षाएं ले सकते। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि छोटे बच्चों पर पढ़ाई का अनावश्यक दबाव न पड़े। कई कोचिंग सेंटर छोटे बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दाखिला देते हैं, जो उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है।
- छात्रों की मानसिक सेहत पर जोर: विधेयक में छात्रों की मानसिक सेहत को प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत कोचिंग सेंटरों को समय-समय पर काउंसलिंग सत्र आयोजित करने होंगे, ताकि छात्रों के मानसिक तनाव को कम किया जा सके। इसके अलावा, कोचिंग सेंटरों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे छात्रों पर अत्यधिक दबाव न डालें। सेंटरों को अपनी कक्षाओं का समय और पाठ्यक्रम इस तरह से डिज़ाइन करना होगा कि छात्रों को पर्याप्त आराम और मनोरंजन का समय मिले।
- फीस की पारदर्शिता: कोचिंग सेंटरों की अनियंत्रित फीस एक बड़ी समस्या रही है। कई सेंटर अभिभावकों से मनमानी फीस वसूलते हैं, जिससे उन पर आर्थिक बोझ पड़ता है। विधेयक में यह प्रावधान है कि कोचिंग सेंटरों को अपनी फीस संरचना को पारदर्शी रखना होगा। फीस की जानकारी रजिस्ट्रेशन के समय जिला समिति को देनी होगी, और इसे सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना होगा। अगर कोई सेंटर निर्धारित फीस से ज्यादा वसूलता पाया गया, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता: विधेयक में यह भी प्रावधान है कि कोचिंग सेंटरों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूरी करनी होगी। शिक्षकों की योग्यता की जांच जिला समिति द्वारा की जाएगी। इसके अलावा, सेंटरों को अपने शिक्षकों की जानकारी, जैसे उनकी डिग्री और अनुभव, जिला समिति को देनी होगी। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
- नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई: विधेयक में नियम तोड़ने वाले कोचिंग सेंटरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। पहली बार नियम तोड़ने पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। दूसरी बार नियम तोड़ने पर यह जुर्माना बढ़कर 50 हजार रुपये हो जाएगा। इसके बाद भी अगर सेंटर नियम तोड़ता है, तो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है। यह प्रावधान कोचिंग सेंटरों को नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करेगा।
विधेयक का प्रभाव: कोचिंग सेंटरों और छात्रों पर क्या असर होगा?
राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण और विनियमन) विधेयक, 2025 के लागू होने से कोचिंग सेंटरों और छात्रों पर कई तरह के प्रभाव पड़ने की संभावना है। इन प्रभावों को विस्तार से समझते हैं ।
- छात्रों की मानसिक सेहत में सुधार: इस विधेयक का सबसे बड़ा प्रभाव छात्रों की मानसिक सेहत पर पड़ेगा। कोचिंग सेंटरों में पढ़ने वाले छात्रों को अक्सर लंबे समय तक पढ़ाई करनी पड़ती है, जिससे वे तनाव और अवसाद का शिकार हो जाते हैं। विधेयक में काउंसलिंग सत्र और दबाव कम करने के प्रावधानों से छात्रों को राहत मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कोचिंग सेंटर इन नियमों का सख्ती से पालन करते हैं, तो छात्रों में आत्महत्या की प्रवृत्ति में कमी आ सकती है।
- कोचिंग सेंटरों पर नियंत्रण: विधेयक के लागू होने से कोचिंग सेंटरों की अनियंत्रित गतिविधियों पर लगाम लगेगी। अभी तक कई कोचिंग सेंटर बिना किसी रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहे थे, और उनकी फीस, शिक्षण पद्धति, और बुनियादी ढांचे की कोई जांच नहीं हो रही थी। अब अनिवार्य रजिस्ट्रेशन और नियमित निगरानी से कोचिंग सेंटरों को जवाबदेह बनाया जाएगा।
- अभिभावकों को आर्थिक राहत: कोचिंग सेंटरों की मनमानी फीस से अभिभावकों को काफी परेशानी होती थी। कई सेंटर बिना किसी पारदर्शिता के फीस बढ़ा देते थे, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ पड़ता था। विधेयक में फीस की पारदर्शिता और नियंत्रण के प्रावधान से अभिभावकों को राहत मिलेगी।
- शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार: शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता और उनकी जांच के प्रावधान से कोचिंग सेंटरों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। अभी तक कई सेंटर अप्रशिक्षित शिक्षकों को नियुक्त करते थे, जो छात्रों के लिए नुकसानदायक था। अब सेंटरों को योग्य शिक्षकों को नियुक्त करना होगा, जिससे छात्रों को बेहतर शिक्षा मिलेगी।
- छोटे कोचिंग सेंटरों पर असर: हालांकि यह विधेयक बड़े कोचिंग सेंटरों के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन छोटे कोचिंग सेंटरों को इससे परेशानी हो सकती है। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, फीस की पारदर्शिता, और अन्य नियमों का पालन करने के लिए छोटे सेंटरों को अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत होगी। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छोटे सेंटर बंद हो सकते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर कोचिंग की सुविधा प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों की राय:
विधेयक को लेकर क्या कहते हैं जानकार?
राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण और विनियमन) विधेयक, 2025 को लेकर शिक्षा विशेषज्ञों और हितधारकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली है। कुछ विशेषज्ञों ने इस विधेयक का स्वागत किया है, जबकि कुछ ने इसके लागू होने में आने वाली चुनौतियों की ओर इशारा किया है।
डॉ. रमेश शर्मा, शिक्षा विशेषज्ञ: “यह विधेयक एक स्वागत योग्य कदम है। कोचिंग सेंटरों में अनियंत्रित गतिविधियों पर लगाम लगाना बहुत जरूरी था। खासकर कोटा जैसे शहरों में, जहां छात्रों पर अत्यधिक दबाव के कारण आत्महत्या के मामले बढ़ रहे हैं, वहां इस तरह के कानून की सख्त जरूरत थी। हालांकि, सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस कानून का सही तरीके से पालन हो, वरना यह सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा।”
सुनीता मेहता, अभिभावक: “मेरे बेटे ने कोटा में एक कोचिंग सेंटर में दाखिला लिया था, लेकिन वहां का दबाव इतना ज्यादा था कि उसे 6 महीने बाद वापस लाना पड़ा। इस विधेयक से अगर कोचिंग सेंटरों में दबाव कम होगा और काउंसलिंग की सुविधा मिलेगी, तो यह अभिभावकों और छात्रों के लिए बहुत बड़ी राहत होगी।”
अजय सिंह, कोचिंग सेंटर संचालक: “हमें इस विधेयक से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सरकार को रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को आसान बनाना चाहिए। छोटे कोचिंग सेंटरों के लिए इतने सारे नियमों का पालन करना मुश्किल होगा। सरकार को हमें कुछ समय देना चाहिए ताकि हम इन नियमों के लिए तैयार हो सकें।”
सरकार का रुख-शिक्षा मंत्री का बयान:
विधानसभा में विधेयक पेश करने के बाद शिक्षा मंत्री ने कहा, “हमारा मकसद कोचिंग सेंटरों को बंद करना नहीं है, बल्कि उन्हें नियंत्रित करना है ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो। कोचिंग सेंटरों में बढ़ते दबाव और मानसिक तनाव को देखते हुए यह कदम जरूरी था। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इस कानून का सख्ती से पालन हो, और कोचिंग सेंटरों को भी इसमें सहयोग करना होगा।”
शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार जल्द ही एक हेल्पलाइन नंबर शुरू करेगी, जहां छात्र और अभिभावक कोचिंग सेंटरों से संबंधित अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। इसके अलावा, जिला समितियों को सक्रिय रूप से कोचिंग सेंटरों की निगरानी करने का निर्देश दिया गया है।
चुनौतियां: विधेयक को लागू करने में क्या दिक्कतें आ सकती हैं?
हालांकि राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण और विनियमन) विधेयक, 2025 एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसे लागू करने में कई चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। इन चुनौतियों को समझना जरूरी है ताकि सरकार पहले से ही इनके लिए तैयार रह सके।
- रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में देरी: राजस्थान में हजारों कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं, और सभी को रजिस्टर करना एक समय लेने वाली प्रक्रिया हो सकती है। अगर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में देरी होती है, तो कई सेंटर बिना रजिस्ट्रेशन के चलते रह सकते हैं, जिससे कानून का उल्लंघन होगा।
- जिला समितियों की क्षमता: विधेयक में जिला समितियों को कोचिंग सेंटरों की निगरानी और रजिस्ट्रेशन की जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इन समितियों के पास पर्याप्त संसाधन और कर्मचारी हैं? अगर समितियां सही तरीके से काम नहीं कर पाईं, तो विधेयक का प्रभाव कम हो सकता है।
- कोचिंग सेंटरों का विरोध: कुछ कोचिंग सेंटर, खासकर बड़े सेंटर, इस विधेयक का विरोध कर सकते हैं। उनका तर्क हो सकता है कि यह कानून उनकी स्वतंत्रता को सीमित करता है। अगर कोचिंग सेंटर सरकार के साथ सहयोग नहीं करते, तो विधेयक को लागू करना मुश्किल हो सकता है।
- छात्रों और अभिभावकों की जागरूकता: विधेयक के प्रभावी होने के लिए यह जरूरी है कि छात्र और अभिभावक इसके प्रावधानों के बारे में जागरूक हों। अगर उन्हें यह नहीं पता होगा कि वे अपनी शिकायतें कहां दर्ज करा सकते हैं, तो वे कोचिंग सेंटरों की अनुचित प्रथाओं का शिकार बनते रहेंगे।
भविष्य की संभावनाएं
भविष्य में कोचिंग सेंटरों को निम्नलिखित बदलावों को अपनाना पड़ सकता है।
- कोचिंग सेंटरों का नया स्वरूप: राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण और विनियमन) विधेयक, 2025 के लागू होने से कोचिंग सेंटरों का स्वरूप बदल सकता है। यह विधेयक न केवल कोचिंग सेंटरों को नियंत्रित करेगा, बल्कि उन्हें एक नई दिशा भी दे सकता है।
- होलिस्टिक एजुकेशन पर जोर: कोचिंग सेंटरों को अब सिर्फ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी तक सीमित नहीं रहना होगा। उन्हें छात्रों के समग्र विकास पर ध्यान देना होगा, जिसमें उनकी मानसिक सेहत, शारीरिक स्वास्थ्य, और रचनात्मकता शामिल होगी
- टेक्नोलॉजी का उपयोग: कोचिंग सेंटरों को अपनी शिक्षण पद्धति में टेक्नोलॉजी को शामिल करना होगा। ऑनलाइन कक्षाएं, डिजिटल काउंसलिंग, और एआई-आधारित लर्निंग टूल्स का उपयोग बढ़ सकता है
- छात्रों के लिए बेहतर सुविधाएं: विधेयक के तहत कोचिंग सेंटरों को अपने बुनियादी ढांचे में सुधार करना होगा। इसमें बेहतर कक्षाएं, लाइब्रेरी, और मनोरंजन की सुविधाएं शामिल हो सकती हैं।
- अभिभावकों के साथ बेहतर संवाद: कोचिंग सेंटरों को अभिभावकों के साथ नियमित संवाद करना होगा। उन्हें छात्रों की प्रगति, उनकी समस्याओं, और काउंसलिंग सत्रों की जानकारी अभिभावकों को देनी होगी।
यह विधेयक एक नई शुरुआत की उम्मीद
राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण और विनियमन) विधेयक, 2025 राजस्थान में कोचिंग सेंटरों के लिए एक नई शुरुआत की उम्मीद लेकर आया है। यह विधेयक न केवल कोचिंग सेंटरों को नियंत्रित करेगा, बल्कि छात्रों की मानसिक सेहत और शिक्षा की गुणवत्ता को भी प्राथमिकता देगा। हालांकि, इस विधेयक को लागू करने में कई चुनौतियां हैं, लेकिन अगर सरकार और हितधारक मिलकर काम करें, तो यह कानून कोचिंग सेंटरों के संचालन में एक सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
छात्रों, अभिभावकों, और कोचिंग सेंटरों के लिए यह एक नई राह होगी, जहां शिक्षा का मकसद सिर्फ प्रतियोगिता जीतना नहीं, बल्कि छात्रों का समग्र विकास करना होगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विधेयक कागजों से निकलकर हकीकत में कितना प्रभावी साबित होता है।