राजस्थान में स्कूलों को मिलेगा खेल किट का लाभ: 25 मार्च तक होगी आपूर्ति, 22 करोड़ 29 लाख रुपये की राशि होगी खर्च

राजस्थान में स्कूलों को मिलेगा खेल किट का लाभ: 25 मार्च तक होगी आपूर्ति, 22 करोड़ 29 लाख रुपये की राशि होगी खर्च

 राजस्थान सरकार ने राज्य के सरकारी और निजी स्कूलों में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस नई पहल के तहत, 20 हजार से अधिक स्कूलों को मुफ्त खेल किट (स्पोर्ट्स किट) उपलब्ध कराई जाएगी। इस योजना की घोषणा के अनुसार, इन किट्स की आपूर्ति 25 मार्च 2025 तक पूरी कर ली जाएगी, और इसके लिए 22 करोड़ 29 लाख रुपये की राशि खर्च की जाएगी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में खेलकूद को प्रोत्साहित करना और छात्रों के शारीरिक विकास के साथ-साथ उनकी खेल प्रतिभा को निखारना है।

योजना का परिचय और उद्देश्य:

राजस्थान सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नया आयाम जोड़ते हुए खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में यह कदम उठाया है। इस योजना के तहत, प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को खेल सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे अपनी पढ़ाई के साथ-साथ शारीरिक गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से भाग ले सकें। इस पहल का उद्देश्य न केवल छात्रों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है, बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में खेल संस्कृति को मजबूत करना भी है।

शिक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता, अरुण भोला, जो इस योजना के प्रभारी हैं, ने बताया कि यह कदम छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए लिया गया है। उन्होंने कहा, “आज के समय में बच्चों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बहुत महत्वपूर्ण है। खेल न केवल शारीरिक फिटनेस को बढ़ाते हैं, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, नेतृत्व और टीम वर्क की भावना भी विकसित करते हैं। हम चाहते हैं कि राजस्थान के हर स्कूल में खेलों को बढ़ावा मिले, ताकि हमारे बच्चे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें।

योजना का विस्तृत विवरण:

इस योजना के तहत, 20 हजार से अधिक स्कूलों को खेल किट वितरित की जाएगी। इन किट्स की कीमत 4 हजार से लेकर 23 हजार रुपये तक होगी, जो स्कूल के स्तर और जरूरतों के आधार पर अलग-अलग होंगी। योजना में शामिल किट्स की कुल लागत 22 करोड़ 29 लाख रुपये आंकी गई है। किट्स को तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:

  1. प्राथमिक स्कूलों के लिए स्पोर्ट्स किट: इन किट्स की कीमत 8,997 रुपये होगी। इनमें बुनियादी खेल सामग्री जैसे कि बैडमिंटन रैकेट, शटल कॉक, फुटबॉल, और रस्सी कूदने के लिए रस्सियां शामिल होंगी। इन किट्स की कुल लागत 4,725 रुपये प्रति किट होगी, और इन्हें 4,25,10,825 रुपये की राशि के साथ वितरित किया जाएगा।
  2. उच्च प्राथमिक स्कूलों के लिए स्पोर्ट्स किट: इन किट्स की कीमत 5,795 रुपये होगी। इनमें कुछ अतिरिक्त सामग्री जैसे कि क्रिकेट किट, वॉलीबॉल, और टेनिस रैकेट शामिल होंगे। इन किट्स की कुल लागत 9,300 रुपये प्रति किट होगी, और इन्हें 5,38,92,350 रुपये की राशि के साथ वितरित किया जाएगा।
  3. माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों के लिए स्पोर्ट्स किट: इन किट्स की कीमत 5,328 रुपये होगी। इनमें अधिक उन्नत खेल सामग्री जैसे कि क्रिकेट बैट, बॉल, हॉकी स्टिक, और अन्य उपकरण शामिल होंगे। इन किट्स की कुल लागत 23,746 रुपये प्रति किट होगी, और इन्हें 12,65,18,688 रुपये की राशि के साथ वितरित किया जाएगा।

कुल मिलाकर, इस योजना के तहत 20,120 स्कूलों को किट्स वितरित की जाएंगी, और इनकी कुल लागत 22,29,23,013 रुपये होगी।

वितरण प्रक्रिया और समय सीमा: राजस्थान सरकार ने इस योजना को लागू करने के लिए एक सख्त समयसीमा तय की है। शिक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि सभी किट्स की आपूर्ति 25 मार्च 2025 तक पूरी कर ली जाएगी। इसके लिए जिला स्तर पर एक विशेष टीम का गठन किया गया है, जो स्कूलों तक किट्स पहुंचाने और उनके वितरण की निगरानी करेगी।

वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए, सरकार ने एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है, जहां स्कूलों को अपनी जरूरतों के अनुसार किट्स के लिए आवेदन करना होगा। यह पोर्टल स्कूलों को अपनी स्थिति, छात्रों की संख्या, और आवश्यक खेल सामग्री की सूची जमा करने की अनुमति देता है। इसके बाद, जिला शिक्षा अधिकारियों द्वारा स्कूलों की सूची तैयार की जाएगी, और किट्स का वितरण शुरू होगा।

लाभ और प्रभाव:

इस योजना से राजस्थान के स्कूलों में खेल गतिविधियों को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना न केवल छात्रों के शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाएगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों को बढ़ावा देकर वहां की प्रतिभाओं को सामने लाने में भी मदद करेगी।

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस योजना से निम्नलिखित लाभ होंगे:

  1. शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार: खेल गतिविधियों में भाग लेने से छात्रों का शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होगा, और मोटापा, तनाव, और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में कमी आएगी।
  2. खेल प्रतिभा को निखार: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में खेल सामग्री की कमी के कारण कई प्रतिभाशाली छात्र अपनी क्षमता का प्रदर्शन नहीं कर पाते। यह योजना उन्हें एक मंच प्रदान करेगी, जिससे वे अपनी प्रतिभा को निखार सकें।
  3. टीम वर्क और नेतृत्व का विकास: खेलों के माध्यम से छात्रों में टीम वर्क, नेतृत्व, और अनुशासन की भावना विकसित होगी, जो उनके भविष्य के लिए लाभकारी होगी।
  4. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन: इस योजना से उत्पन्न होने वाली प्रतिभाएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान का नाम रोशन कर सकती हैं।

सरकार की अपील और भविष्य की योजनाएं

शिक्षा मंत्रालय ने स्कूलों, शिक्षकों, और अभिभावकों से इस योजना का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की है। अरुण भोला ने कहा, “हम चाहते हैं कि स्कूल इस योजना को गंभीरता से लें और बच्चों को खेल गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें। यह केवल किट्स का वितरण नहीं है, बल्कि एक ऐसी संस्कृति का निर्माण है, जो हमारे बच्चों को स्वस्थ और आत्मविश्वास से भरा बनाए।

“सरकार ने यह भी घोषणा की है कि इस योजना के सफल होने पर इसे और विस्तार दिया जाएगा। भविष्य में, स्कूलों में खेल प्रशिक्षकों की नियुक्ति, खेल मैदानों का निर्माण, और खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन भी इस योजना का हिस्सा बन सकता है। इसके अलावा, सरकार ने निजी स्कूलों को भी इस योजना में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया है, ताकि अधिक से अधिक छात्रों को इसका लाभ मिल सके।

 राजस्थान सरकार की यह पहल शिक्षा और खेल के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। 20 हजार से अधिक स्कूलों में खेल किट्स का वितरण न केवल छात्रों के लिए एक सुनहरा अवसर है, बल्कि राज्य में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम भी है। यह योजना न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाएगी, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच की खाई को भी कम करेगी, जिससे हर बच्चे को अपनी प्रतिभा दिखाने का समान अवसर मिलेगा।

25 मार्च 2025 तक किट्स की आपूर्ति पूरी होने के बाद, यह देखना दिलचस्प होगा कि यह योजना स्कूलों और छात्रों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव लाती है। राजस्थान सरकार की इस पहल को सभी हितधारकों से पूरा समर्थन मिलना चाहिए, ताकि यह एक सफल मॉडल बन सके और अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सके।

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