25 ग्राम पंचायत पर बनेगी एक पंचायत समिति 2 लाख से अधिक आबादी होने पर होगा पुनर्गठन 20 जनवरी से 15 अप्रैल के बीच पंचायती राज संस्थाओं के पुनर्गठन का होगा काम ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने जारी किया आदेश कलेक्टर को किया अधिकृत

प्रदेश में इस साल ग्राम पंचायतों से लेकर पंचायत समितियों और जिला परिषदों की संख्या बढ़ेगी। कैबिनेट ने 28 दिसंबर 2024 को ही पंचायती राज संस्थाओं के पुनर्गठन करने का फैसला किया था। कैबिनेट के फैसले के बाद अब पंचायती राज विभाग ने पुनर्गठन की तैयारी शुरू कर दी है।

प्रदेश में 2 लाख या इससे ज्यादा आबादी और 40 या इससे ज्यादा ग्राम पंचायत वाली पंचायत समितियों का पुनर्गठन करके उनसे नई यूनिट बनाई जाएगी। अब 25 ग्राम पंचायत पर एक पंचायत समिति बनेगी। पहले 40 पंचायत पर एक पंचायत समिति बनती थी। नई ग्राम पंचायत मुख्यालय को लेकर भी कलेक्टरों को सरकार ने गाइडलाइन दी है। उधर, रेगिस्तान के जिलों बीकानेर, बाड़मेर, जैसलमेर और जोधपुर में डेढ़ लाख की आबादी और 40 से ज्यादा ग्राम पंचायत वाली पंचायत समितियों को पुनर्गठित कराया जाएगा। बारां के किशनगंज और शाहबाद क्षेत्र में भी यही मापदंड लागू होंगे।

नई ग्राम पंचायत के लिए न्यूनतम 3000 व अधिकतम 5500 की आबादी का पैमाना रहेगा। नई ग्राम पंचायत और पंचायत समितियां के लिए जनसंख्या का आधार 2011 की जनगणना ही रहेगी। पंचायती राज ढांचे के बदलाव के लिए 20 जनवरी से 15 अप्रैल के बीच पंचायती राज संस्थाओं के पुनर्गठन का काम होगा

पंचायती राज विभाग की ओर से ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के नव सृजन और पुनर्गठन की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस संबंध में विभाग के शासन सचिव एवं आयुक्त जोगाराम ने आदेश जारी कर प्रदेश के सभी कलेक्टर्स अधिकृत कार्रवाई पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर प्रस्ताव तैयार करने का कहा गया है।

नई ग्राम पंचायत के लिए न्यूनतम 3000 व अधिकतम 5500 की आबादी का पैमाना रहेगा। नई ग्राम पंचायत और पंचायत समितियां के लिए जनसंख्या का आधार 2011 की जनगणना ही रहेगी। पंचायती राज ढांचे के बदलाव के लिए 20 जनवरी से 15 अप्रैल के बीच पंचायती राज संस्थाओं के पुनर्गठन का काम होगा ।

नए आदेश के अनुसार जिन पंचायत समितियों में 40 से अधिक ग्राम पंचायत और 2 लाख या इससे अधिक आबादी है उनका पुनर्गठन होगा। ग्राम पंचायत और पंचायत समिति के पुनर्गठन के प्रस्ताव आपत्तियों के निस्तारण के बाद सरकार को भिजवाए जाएंगे। इसके बाद सरकार इसकी घोषणा करेगी।

नवसृजित ग्राम पंचायत एक ही विधानसभा में रखनी होगी, राजस्व ग्राम भी विभाजित नहीं होगा :- 

  • गाइडलाइन के अनुसार नवसृजित एवं पुनर्गठन ग्राम पंचायत एक ही विधानसभा क्षेत्र में रखी जा सकेगी
  • किसी भी राजस्व ग्राम को विभाजित कर दो पंचायतों में नहीं रखा जाएगा।
  • संपूर्ण राजस्व ग्राम एक ही पंचायत में रहेगा।
  • किसी ग्राम के निवासियों की मांग और प्रशासनिक दृष्टि से ऐसे ग्रामों को वर्तमान ग्राम पंचायत से दूसरी ग्राम पंचायत में सम्मिलित किया जा सकता है परंतु उस ग्राम की दूरी नई ग्राम पंचायत के मुख्यालय से 6 किमी से अधिक की नहीं होनी चाहिए।
  • राज्य के अनुसूचित एवं मरुस्थलीय क्षेत्रों के लिए दूरी का निर्धारण करने के लिए जिला कलेक्टर प्रशासनिक एवं व्यवहारिक दृष्टिकोण से स्वयं निर्णय ले सकेंगे।
  • ग्राम पंचायत और पंचायत समिति के नवसृजन, पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन के प्रस्ताव तैयार होने के बाद कलेक्टर कार्यालय, जिला परिषद, पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत कार्यालय के नोटिस बोडों पर सार्वजनिक अवलोकन के लिए प्रकाशन किया जाएगा।
  • जिस ग्राम पंचायत की वर्तमान सीमाओं में किसी प्रकार का परिवर्तन होना है तो इस परिवर्तन से प्रभावित संबंधित ग्राम पंचायतों के नोटिस बोर्ड पर भी उनसे संबंधित प्रस्ताव का प्रकाशन करवाया जाएगा
  • इन प्रस्ताव पर नागरिक आपत्ति एवं सुझाव दे सकेंगे। इसके बाद कलेक्टर द्वारा प्रस्ताव सरकार को भिजवाकर अनुमोदन करवाना होगा।
  • लोगों की मांग पर इलाके बदल सकेंगे

स्थानीय लोगों की मांग पर नई पंचायत बन सकेगी :- 

स्थानीय लोगों की मांग पर नई पंचायत बन सकेगी। इलाके को दूसरी पंचायत में शामिल किया जा सकेगा। अगर किसी इलाके के लोग मौजूदा ग्राम पंचायत की जगह उनके वार्ड या इलाके को दूसरी पंचायत में शामिल करना चाहते हैं। इसकी मंजूरी दी जा सकेगी, लेकिन उसे दूसरी ग्राम पंचायत के मुख्यालय से उसे इलाके की दूरी 6 किलोमीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

गाईड लाइन के अनुसार :- 

  • पुनर्गठन में एक राजस्व गांव एक ही पंचायत में रहेगा।
  • किसी भी पंचायत का पूरा क्षेत्र ही किसी विधानसभा सीट में होना चाहिए।
  • नई ग्राम पंचायत और पंचायत समितियों के लिए कलेक्टर 20 जनवरी से 18 फरवरी तक प्रस्ताव तैयार करें सकेंगे।
  • पुनर्गठन करने के बारे में 20 फरवरी से लेकर 21 मार्च तक आपत्तियां मांगी जाएगी ।
  • 23 मार्च से 01 अप्रैल तक ड्राफ्ट प्रस्ताव के बारे में जनता से मिली आपत्तियां और सुझावों का निपटारा किया जाएगा।
  • 3 अप्रैल से 15 अप्रैल तक प्रस्ताव पंचायती राज विभाग को भेजने होंगे।
  • अंतिम निर्णय ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग करेगा।

पंचायतीराज सस्थाओं के सीमा परिवर्तन परिसीमन दिशा निर्देश -> यहां देखें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!