🔴 BREAKING NEWS: 5 साल से अटकी शिक्षकों की DPC, 42 हजार से ज्यादा पद खाली — हजारों तृतीय श्रेणी शिक्षक पदोन्नति के इंतजार में
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राजस्थान के शिक्षा विभाग में वर्षों से लंबित पड़ी तृतीय श्रेणी शिक्षकों की पदोन्नति (DPC) प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। कानूनी विवादों के चलते पिछले 5 वर्षों से हजारों शिक्षक पदोन्नति से वंचित हैं, वहीं प्रदेश के सरकारी स्कूलों में वरिष्ठ अध्यापक पदों की संख्या 42 हजार पार पहुंच चुकी है। इसका सीधा असर लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
इस गंभीर स्थिति को लेकर राजस्थान पंचायतीराज एवं माध्यमिक शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संघ ने शिक्षा विभाग पर उदासीन रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए DPC जल्द कराने, पारदर्शी ट्रांसफर पॉलिसी लागू करने और 8 साल से बंद तबादले शुरू करने की ठोस मांग रखी है।
📌 5 साल से क्यों अटकी है तृतीय श्रेणी शिक्षकों की DPC?
शिक्षा विभाग द्वारा पिछले पांच शैक्षणिक सत्रों से तृतीय श्रेणी से वरिष्ठ अध्यापक पद पर तथा तीन वर्षों से वरिष्ठ अध्यापक से व्याख्याता पद पर पदोन्नति नहीं की गई है। इसकी मुख्य वजह एडिशनल विषयों से जुड़ा विवाद है, जो वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
संघ के पूर्व प्रदेश महामंत्री राजेश शर्मा ने बताया कि मामला कोर्ट में लंबित होने के बावजूद विभाग की ओर से न तो प्रभावी पैरवी की जा रही है और न ही वैकल्पिक समाधान अपनाए जा रहे हैं, जैसे — विवादित विषयों को अलग रखते हुए शेष विषयों की DPC कराना। नतीजतन हजारों शिक्षक बिना पदोन्नति पाए ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
📊 स्कूलों में 42 हजार से ज्यादा वरिष्ठ अध्यापक पद रिक्त — छात्रों की पढ़ाई पर असर
प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में वरिष्ठ अध्यापक पदों की संख्या तेजी से घट रही है और वर्तमान में यह आंकड़ा 42,000 से अधिक हो चुका है। इससे विषय शिक्षक नहीं मिल पाने के कारण—
- ✔️ छात्रों का पाठ्यक्रम अधूरा रह रहा है
- ✔️ परीक्षा परिणाम प्रभावित हो रहे हैं
- ✔️ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था पर संकट गहरा रहा है
शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि शीघ्र DPC नहीं हुई तो आने वाले सत्रों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
⏳ हर साल हजारों शिक्षक बिना पदोन्नति सेवानिवृत्त
संघ के जिलाध्यक्ष हरीसिंह गुर्जर ने बताया कि पिछले पांच वर्षों से DPC नहीं होने के कारण प्रतिवर्ष हजारों शिक्षक पदोन्नति के अधिकार से वंचित रहकर सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इससे केवल वरिष्ठ अध्यापक पद ही नहीं, बल्कि व्याख्याता पदों की पदोन्नति श्रृंखला भी पूरी तरह ठप हो चुकी है।
इसका असर नई शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर भी पड़ रहा है क्योंकि तृतीय श्रेणी शिक्षकों के पद खाली नहीं हो पा रहे, जिससे प्रशिक्षित युवाओं के लिए नौकरी के अवसर सीमित हो रहे हैं।
🔁 8 साल से तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले बंद — बढ़ता आक्रोश
सरकारें बदलती रहीं लेकिन तृतीय श्रेणी शिक्षकों के लिए अब तक कोई स्थायी ट्रांसफर पॉलिसी लागू नहीं हो सकी। अंतिम बार वर्ष 2018 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी के कार्यकाल में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण किए गए थे।
इसके बाद से लगातार आठ वर्षों तक इस संवर्ग को तबादलों से वंचित रखा गया है, जबकि अन्य सभी संवर्गों में नियमित स्थानांतरण होते रहे हैं। इससे शिक्षकों में भारी असंतोष और मानसिक दबाव की स्थिति बन रही है।
📝 मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन — संघ की प्रमुख मांगें
- ✅ सुप्रीम कोर्ट में लंबित DPC प्रकरण की शीघ्र सुनवाई हेतु प्रभावी पैरवी
- ✅ पांच वर्षों से अटकी तृतीय श्रेणी शिक्षकों की पदोन्नति तुरंत कराना
- ✅ वरिष्ठ अध्यापक व व्याख्याता पदों पर पदोन्नति प्रक्रिया बहाल करना
- ✅ पारदर्शी ट्रांसफर पॉलिसी लागू कर तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण शुरू करना
- ✅ शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने हेतु रिक्त पदों को शीघ्र भरना
🚨 शिक्षकों का सवाल — कब मिलेगा पदोन्नति का अधिकार?
प्रदेश के सबसे बड़े शिक्षक संवर्ग तृतीय श्रेणी शिक्षक अब सवाल उठा रहे हैं कि जब अन्य संवर्गों में नियमित पदोन्नति और स्थानांतरण हो रहे हैं तो उन्हें वर्षों तक क्यों वंचित रखा जा रहा है? संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की राह अपनाई जा सकती है।
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